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20 lakh crore package details “20 लाख करोड़ पैकेज” In Hindi

Summary

IMF (आई.एम.एफ) के आंकड़ों के अनुसार पूरे विश्व की जी डी पी का आकार लगभग 83 ट्रिलियन डॉलर है जिसमें सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था संयुक्त राज्य अमेरिका की है जिसकी जीडीपी 21.4 ट्रिलियन डॉलर हैं दूसरे नंबर पर चीन है 18.7 […]

IMF (आई.एम.एफ) के आंकड़ों के अनुसार पूरे विश्व की जी डी पी का आकार लगभग 83 ट्रिलियन डॉलर है जिसमें सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था संयुक्त राज्य अमेरिका की है जिसकी जीडीपी 21.4 ट्रिलियन डॉलर हैं दूसरे नंबर पर चीन है 18.7 ट्रिलियन डॉलर के साथ तीसरे नंबर पर जापान है चौथे नंबर पर जर्मनी पांचवें नंबर पर भारत 2.9 ट्रिलियन डॉलर के साथ
1. USA (यू.एस.ए)
2. China (चाइना)
3. Japan (जापान)
4. Germany (जर्मनी)
5. India (इंडिया)

यहां यह बताना आवश्यक है की कोरोना वायरस से पूरा विश्व समुदाय परेशान है कोरोना वायरस ने कई देशों की अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा प्रभाव डाला है, अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए विश्व के कई देशों ने एक पैकेज दिया ताकि अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ सके|

भारत की जीडीपी 2.9 ट्रिलियन डॉलर हैं जिसको भारतीय रुपए मैं बदले तो यह 200 लाख करोड़ रुपए होते हैं भारत सरकार ने हाल ही में घोषणा की है कि 20 लाख करोड़ रुपए वह भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार को बढ़ावा देने के लिए खर्च करेंगी जो देश की कुल जीडीपी का 10% है |

मगर यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि 20 लाख करोड़ का पैकेज जो घोषित हुआ है इसमें पहले का भी पैकेट शामिल है|

1. गरीब कल्याण योजना के लिए 1,70,000 करोड़ का कुछ समय पहले जो पैकेज था, वह भी इसमें शामिल है इस योजना के तहत लोगों के खाते में ₹500/ 1000 हस्तांरित किए गए एवं कुछ आश्रितो को अनाज दिए गए आदि शामिल है|

2. इसमें आरबीआई (RBI) द्वारा तरलता बढ़ाने के लिए समय-समय पर जो 6.8 लाख करोड़ का पैकेज घोषित किए थे वह भी शामिल है|

गौरतलब है कि आरबीआई (RBI) द्वारा घोषित किए गए सुगमता उपाय लोगों को सहायता पहुंचाने के अप्रत्यक्ष उपाय माने जाते हैं जो प्रत्यक्ष की तुलना में कम लाभकारी होते हैं|

(RBI) आरबीआई पैसा तरलता प्रदान करने के लिए देती है दरअसल आरबीआई द्वारा घोषित पैकेज का रकम बैंक आरबीआई से लेकर पुनः आरबीआई के पास जमा करते हैं और बैंक ब्याज भी पाते हैं कारण है कि सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार जब आरबीआई के माध्यम से बैंक को पैसा मिलता है बांटने के लिए ऋण के रूप में तो वह लोगों को ऋण देने में सही से सहयोग नहीं करती है क्योंकि यहां के बैंक कल्याण-कारी ना होकर लाभ कमाने के लिए करती है समीक्षकों का कहना है कि सरकार को चाहिए कि लाभुकों को सीधे उनके खाते में पैसे दिए जाए ना के बीच में किसी बिचौलियों को शामिल किया जाए क्योंकि इससे लाभुकों को सही से लाभ नहीं मिल पाता है आप अपने आसपास के चारों और देख कर भी समझ सकते हैं कि उपयुक्त लिखी बातें ताना हद तक सही है |

20 लाख करोड़ पैकेज के मुख्य बातें

MSME (एम.एस.एम.ई.) सेक्टर को बिना गारंटी के कर्ज दिया जाएंगे (लोन) की रकम 3 लाख करोड़ रुपए होगी|

MSME (एम.एस.एम.ई.) की सरकार ने एक नई परिभाषा दी है इन्वेस्टमेंट और टर्न ओवर के हिसाब से है और सीमा पहले से ज्यादा कर दी गई है

वेतन-भोगी कर्मचारियों के लिए EPF (ईपीएफ एंप्लॉय प्रोविडेंट फंड) मेअब तक कंपनी और कर्मचारियों का योगदान 12% होता था अब इसे घटाकर 10 -10 फ़ीसदी कर दिया गया है सरकार का तर्क है कि इससे ईपीएफ में 6775 करोड़ रुपए कम जाएंगे जिस लोगों के पास पैसे ज्यादा रहेंगे|

बिजली आपूर्ति करने वाले कंपनियों को 90,000 करोड़ का लोन दिया जाएगा|

कर्ज देने वाली छोटी संस्थाएं जिनको माइक्रोफाइनासिंग यूनिट कहते हैं उनको 50,000 करोड़ का लोन दिया जाएगे ताकि वे छोटे लोन दे सकें|

समझने वाली बात है कि माननीय प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री के द्वारा 20 लाख करोड़ यानी वर्तमान जीडीपी का 10% बताया है|

पहले आपको जानना चाहिए कि GDP- Gross Domestic Product (सकल घरेलू उत्पाद) किसे कहते हैं

जीडीपी का मतलब एक देश के भीतर साल भर जितनी वस्तुएं उत्पादित होती है और जो सेवाएं होती हैं उनका मोल होता है

ध्यान देने योग्य बात है कि भारत सरकार का बजट लगभग 30 लाख करोड़ का या अर्थात कमाई 30लाख करोड़ जिसमें से 20 लाख करोड़ सरकार कोरोना राहत में दे रही है बात समझ नहीं आ रही है तो नीचे कमेंट सेक्शन में कमेंट करके बताएं__

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